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संचालन

संघ कैसे चलता है

सभी सदस्यों की साधारण सभा निर्णय लेती है। निर्वाचित समितियाँ उन्हें लागू करती हैं। स्वतंत्र समितियाँ विवाद सुलझाती हैं और चुनाव कराती हैं।

संरचना

साधारण सभा से हर जिले तक

हर स्तर अपनी साधारण सभा के प्रति उत्तरदायी है; प्रदेश स्तर सभी सदस्यों के प्रति।

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    और पढ़ेंसाधारण सभासभी पात्र, सक्रिय सदस्य: सर्वोच्च निर्णय-निर्माता संस्था।
    • यह संविधान और नियमों में संशोधन करती है और वार्षिक योजना, बजट और रिपोर्टें स्वीकृत करती है।
    • इसकी बैठक वर्ष में कम से कम एक बार होती है।
    • इसके निर्णय हर इकाई, समिति और पदाधिकारी पर बाध्यकारी हैं।
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    और पढ़ेंप्रांतीय कार्यकारिणी समितिसंघ की मुख्य कार्यकारी संस्था, साधारण सभा के प्रति उत्तरदायी।
    • निर्वाचित: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव (संगठन) और कोषाध्यक्ष।
    • मनोनीत: महासचिव (प्रशासन), प्रचार और मीडिया सचिव और सह-कोषाध्यक्ष।
    • पदेन: 5 विभागीय और 10 संभागीय समितियों के अध्यक्ष।
    • कार्यकाल 3 वर्ष; कोई भी दो कार्यकाल से अधिक पद पर नहीं रहता।
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    और पढ़ें5 विभागीय समितियाँहर निर्माण विभाग के लिए एक, प्रदेश स्तर पर उसका प्रतिनिधित्व करती है।
    • लोक निर्माण; नगरीय विकास और आवास; जल संसाधन; लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी; ग्रामीण यांत्रिकी।
    • इसके चुनाव में केवल उसी विभाग के सदस्य मतदान करते हैं।
    • इसका अध्यक्ष प्रांतीय कार्यकारिणी समिति का सदस्य होता है।
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    और पढ़ें10 संभागीय समितियाँहर राजस्व संभाग के लिए एक, प्रदेश और जिलों को जोड़ती है।
    • चंबल, ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल।
    • ये मुख्य और अधीक्षण यंत्रियों के समक्ष बात रखती हैं।
    • ये अपने संभाग की जिला समितियों की देखरेख करती हैं।
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    और पढ़ें55 जिला समितियाँसंघ की मूल इकाई, हर जिले में एक।
    • अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष, सभी जिले के सदस्यों द्वारा निर्वाचित।
    • ये कार्यपालन यंत्रियों के समक्ष बात रखती हैं और सदस्यता अभियान चलाती हैं।
    • ये सदस्यों के मामले संभाग से होते हुए प्रदेश तक ले जाती हैं।

स्वतंत्र

अलग रहने वाली समितियाँ

विवाद और चुनाव वे सदस्य संभालते हैं जो किसी कार्यकारी पद पर नहीं हैं।

और पढ़ेंविवाद निवारण और अनुशासन समितिएक अध्यक्ष और दो सदस्यों की स्वतंत्र, स्थायी समिति, पाँच वर्ष के लिए।
  • यह सदस्यों, पदाधिकारियों और समितियों के बीच के विवाद और नियमों से जुड़े प्रश्न सुनती है।
  • जिस प्रांतीय कार्यकारिणी निर्णय को कोई सदस्य नियम-विरुद्ध बताए, यह उसकी समीक्षा करती है।
  • इसका निर्णय अंतिम है; इसके सदस्य किसी कार्यकारिणी समिति में नहीं होते।
और पढ़ेंचुनाव समितितीन सदस्य, हर चुनाव के लिए कार्यकाल समाप्ति से 60 दिन पहले गठित।
  • यह मतदाता सूची और कार्यक्रम बनाती है, और नामांकन जाँच, मतदान और मतगणना कराती है।
  • अनुशासन समिति इसे अनुभवी, निष्पक्ष सदस्यों से गठित करती है।
  • इसके सदस्य आगे बनने वाली समिति में मनोनीत नहीं हो सकते।
और पढ़ेंअंतरिम समितिस्थापना से पहले चुनाव तक संघ चलाती है, अधिकतम एक वर्ष के लिए।
  • संस्थापक सदस्यों द्वारा मनोनीत सात सदस्य।
  • यह सदस्यता अभियान पूरा करती है और पहला चुनाव कराती है।
  • पहला चुनाव 1 फ़रवरी 2027 तक ऑनलाइन होगा।

जवाबदेही

जवाबदेह रखने वाले नियम

हर पदाधिकारी और समिति पर लागू होने वाले नियम।

  • कार्यकाल की सीमातीन वर्ष का कार्यकाल; कोई भी दो कार्यकाल से अधिक पद पर नहीं।
  • कौन चुनाव लड़ सकता हैउम्मीदवार 30 से 55 वर्ष के हों और तीन वर्ष से सदस्य हों; पोर्टल हर नामांकन की जाँच करता है।
  • एक सदस्य, एक मतनिर्णय बहुमत से होते हैं; अध्यक्ष केवल बराबरी पर निर्णायक मत देते हैं।
  • हर वर्ष लेखा परीक्षाचार्टर्ड अकाउंटेंट हर वर्ष लेखा की जाँच करता है, और हर तिमाही 10% वाउचर जाँचे जाते हैं।
  • स्वयं को लाभ नहींकोई पदाधिकारी स्वयं को, अपने परिवार को या जिस फ़र्म में उसकी 2% से अधिक हिस्सेदारी हो, उसे भुगतान स्वीकृत नहीं कर सकता।
  • खुले अभिलेखसदस्य अध्यक्ष की लिखित अनुमति से अभिलेख और लेखा देख सकते हैं।

पदाधिकारीचुनाव